|
|
YAAD
by MS MOHIT DADA
मंद-मंद मुस्कान तुम्हारी, हँसी में यूँ बदलती है
जैसे सावन के मौसम में, कलियाँ रंग बदलती हैं
बात तुम्हारी लगती जैसे, परी देश की गाथा है
तुमको भी सपनो में आकर, राजकुमार जगाता है
हरियाली की बातें तेरी, कुछ यूँ रंग उड़ती हैं
पेड़ों, पौधों, पत्तों की ये, दुनिया नई घुमती हैं
मद्धम स्वर में तेरे मुख से, जब कोई गीत निकलता है
मेरे मन की अंधियारे में, पंछी कोई मचलता है
हाय रे तेरे कोमल वाणी, जब कोई गीत सुनती है
पल भर में मन से सारी ही, व्यथा दूर हो जाती है
करुण गीत जब गाती हो, तो आखें भर-भर आती हैं
ह्रदय वेदनाओं के यह, राज़ कई बताती हैं
जब भी तेरी बात चले, फिर रात ख़त्म नही होती है
समय गतिहीन हो जाता है, और शाम-सुबह नही होती है
|
|